शरीर साम्राज्य का महायुद्ध - अध्याय 12 : संवेदन परिषद
अध्याय 12 : संवेदन परिषद
पाचन घाटी की भट्ठियों से उठा वह धुँआ अब ऊपर कपाल के पहाड़ों तक पहुँच चुका था। गोदामों के ताले टूटने और विश्वास के बिखरने की वह मूक गूँज पूरे साम्राज्य में फैल गई थी। दोनों महलों की दीवारें अब कमज़ोर पड़ चुकी थीं क्योंकि उनके नीचे का आधार—उनका अन्नदाता—अब बिखर चुका था।
यह वह समय था जब देह साम्राज्य की बाहरी सीमाओं पर तैनात संवेदन अंग (The Sensory Council)—आँख, कान और जीभ—जो अब तक केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान का माध्यम थे, उन्होंने महसूस किया कि यदि अब हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो यह साम्राज्य अगली सुबह देखने के लिए जीवित नहीं बचेगा।
रक्तेश अपनी नाव को थ्रेड-वे (तंत्रिका मार्ग) के एक ऐसे चौराहे पर ले आया था, जहाँ से आँख के बड़े 'लेंस मीनार' (Optic Towers) साफ़ दिखाई देते थे। लेकिन आज इन मीनारों पर कोई शांति नहीं थी।
लेंस मीनार के विशाल काँच के गुंबद के नीचे संवेदी अंगों के प्रमुख एकत्र थे।
लॉर्ड ऑप्टिक (आँख के प्रमुख) बार-बार सुदूर उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं की ओर देख रहे थे। उनकी आँखें भीतर के मलबे को देखकर सूज चुकी थीं, लेकिन उनका ध्यान कहीं और था। पिछले कुछ घंटों से सीमाओं पर सब कुछ अस्वाभाविक रूप से शांत था। दूर धुंध में कुछ काली, अस्पष्ट आकृतियाँ रेंगती हुई दिखाई दे रही थीं। सबसे डरावनी बात यह थी कि नासिका मार्ग के पास की दो अग्रिम चौकियों ने अचानक संपर्क खो दिया था। वहाँ से कोई प्रहरी वापस नहीं लौटा था।
"हवा ठंडी हो रही है," लॉर्ड एको (कान के प्रमुख) ने अपनी गुफा की दीवारों से उठती गूँज को सुनते हुए कहा। बस्तियों से आने वाले रोने के स्वर अब एक अजीब, बाहरी सन्नाटे में डूब रहे थे।
मंच के केंद्र में लेडी लिंगुआ खड़ी थीं। उनकी रेशमी पोशाक पर अब कूटनीति की सिलवटें थीं। उन्होंने दोनों प्रमुखों की ओर देखा। कोई लंबा भाषण नहीं हुआ। संवेदन परिषद ने समझ लिया था कि साक्ष्य (आँख), जनता की आवाज़ (कान) और संवाद (जीभ) को अब एक साथ आना ही होगा, क्योंकि दोनों महलों के राष्ट्राध्यक्ष अपनी-अपनी कड़वाहट में अंधे हो चुके थे।
'तर्क द्वार' और 'स्वायत्त दक्षिणी मोर्चे' के बीच के उस नो-मैंड्स लैंड (त्रिशंकु मार्ग) में लेडी लिंगुआ ने एक न्यूट्रल टेबल लगवाई। दोनों शासकों—चांसलर सेरेब्रम और किंग वेंट्रिकल—को एक अंतिम और सीधी वार्ता के लिए आना ही पड़ा।
शाम ढलते-ढलते दोनों राष्ट्राध्यक्ष उस मेज पर आमने-सामने बैठे थे।
चांसलर सेरेब्रम के नीले वस्त्र अब मद्धम पड़ चुके थे। ऑक्सीजन और ग्लूकोज की कमी के कारण उनके न्यूरॉन्स के पल्स धीमे थे। उनके ठीक सामने किंग वेंट्रिकल बैठे थे, जिनका चेहरा पसीने से भीगा था और उनका विशाल, लाल मुकुट मेज पर एक तरफ रखा था। उनकी धड़कनें इतनी कमज़ोर थीं कि मेज पर रखा पानी का प्याला उनके कांपते हाथों के कारण हिल रहा था।
मेज पर एक भयानक, असहनीय खामोशी थी। लेडी लिंगुआ ने आगे बढ़कर मेज के ठीक बीच में रक्तेश की माँ का वह लौटाया हुआ पत्र रख दिया, जिस पर 'गंतव्य अनुपलब्ध' की वह क्रूर काले रंग की मुहर लगी थी।
कोई कुछ नहीं बोला। पूरा एक मिनट बीत गया। कक्ष का सन्नाटा पत्थरों की तरह भारी हो गया।
सेरेब्रम ने उस पत्र को देखा। वेंट्रिकल ने उस पत्र को देखा। दोनों ने एक-दूसरे की ओर नहीं देखा। दोनों जानते थे कि यह मुड़े हुए कागज़ का टुकड़ा अब केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं था, यह उनके अपने-अपने अहंकार का अभियोग-पत्र था।
चांसलर सेरेब्रम की एक उंगली उस मुहर पर जाकर ठहर गई। उनकी आँख के कोने से विद्युत की एक ठंडी बूंद निकली और उस मुड़े हुए कागज़ पर गिर गई। उन्होंने वेंट्रिकल की ओर देखे बिना, बहुत ही धीमी, पत्थरों को भी रुला देने वाली आवाज़ में केवल एक छोटा सा प्रश्न पूछा:
"क्या वह सचमुच लौट आया था?"
किंग वेंट्रिकल ने कुछ नहीं कहा। उन्होंने आगे बढ़कर चांसलर के उस कांपते हुए हाथ को अपने हाथों में ले लिया। उनके हाथ गर्म थे, लेकिन उनमें अब कोई राजनैतिक प्रतिशोध नहीं था। राजा ने अपना सिर मेज पर झुका लिया और उनकी आँखों से निकले आंसू चांसलर की उंगलियों को भिगोने लगे।
वे दोनों समझ गए थे कि वे किस बारे में बात कर रहे थे। उस एक छोटे से सवाल ने स्वीकारोक्ति के सारे लंबे भाषणों को मलबे में तब्दील कर दिया था। दोनों पुराने मित्र अपने ही घमंड के सामने बराबर हार चुके थे।
रक्तेश दूर खड़ा अपनी माँ के उस अधूरे पत्र को देख रहा था।
ठीक उसी समय, कक्ष के भारी कपाट झटके से खुले। लॉर्ड ऑप्टिक भीतर दौड़े आए। उनका चेहरा पूरी तरह सफेद पड़ चुका था और उनके हाथों में Optic Nerve का एक जलता हुआ लाल आपातकालीन संदेश था।
"चांसलर! महाराज!" लॉर्ड ऑप्टिक की आवाज़ डर से काँप रही थी। "उन चौकियों से कोई सैनिक जीवित नहीं बचा... बाहर की दुनिया से इन्फ्लुएंजा (Influenza) की एक विशाल, घातक सेना ने हमारी मुख्य श्वास-दीवार को तोड़ दिया है। वे भीतर घुस चुके हैं।"
कक्ष का तापमान अचानक और तेजी से गिरने लगा। हवा में एक कड़वी, अजनबी गंध तैरने लगी।
लॉर्ड ऑप्टिक का संदेश मेज पर गिर गया।
कक्ष में कोई कुछ नहीं बोला। रक्तेश का कोई संवाद नहीं गूँजा। चांसलर सेरेब्रम का हाथ अभी भी उस पत्र पर था। किंग वेंट्रिकल की उंगलियाँ अभी भी उसी हाथ को थामे हुए थीं।
तभी, सुदूर ऊपरी मीनारों से पहली कड़कती हुई आपातकालीन चेतावनी-सायरन (The Alarm) बज उठी। और हज़ारों वर्षों के इतिहास में पहली बार—
उत्तर और दक्षिण ने एक ही दिशा में देखा।
भाग 2 (श्रेष्ठता की बहस) पूर्णतः समाप्त।