शरीर साम्राज्य का महायुद्ध - अध्याय 6 : असफल समन्वय

 


अध्याय 6 : असफल समन्वय

राइनोवायरस का वह अकेला, सूक्ष्म घुसपैठिया नासिका मार्ग के सुदूर बलगम-दलाद (Mucus Layers) में अपनी प्रतियों का निर्माण कर चुका था। एक से दो, दो से चार, और चार से हजारों की संख्या में फैलते हुए इन परजीवियों ने साम्राज्य की स्वस्थ उपकला कोशिकाओं (Epithelial Cells) को बंधक बना लिया था।

यह कोई महायुद्ध नहीं था, बल्कि सीमा पर लगी एक छोटी सी आग थी, जिसे 'महासमरसता' के पुराने दिनों में कुछ ही पलों के भीतर बुझा दिया जाता था। लेकिन आज, देह साम्राज्य के भीतर की राजनैतिक दूरियों ने इस मामूली संकट को एक भयानक दलदल में बदल दिया था।

रक्तेश का मालवाहक जहाज जब नासिका मार्ग से जुड़ने वाले एक मुख्य रक्त-मार्ग (Capillary) पर लंगर डाले हुए था, तब उसने पहली बार तबाही के दृश्य अपनी आँखों से देखे।

सामने के हवाई घाटों पर अफरा-तफरी मची थी। प्रभावित बस्तियों की कोशिकाएं खिड़कियों से चिल्ला रही थीं, "हम पर हमला हुआ है! हमारे मुख्यालयों (Ribosomes) को हाईजैक किया जा रहा है! रक्षा सेना कहाँ है? चांसलर के दूत कहाँ हैं?"

तभी रक्तेश ने देखा कि उसकी पुरानी सराय की दोस्त, वीरा (न्यूट्रोफिल सिपाही), अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ वहां पहुँची। उसकी आँखों में कर्तव्य की आग थी, लेकिन उसके कदम बंधे हुए थे। 'इम्यून जुंटा' (सैन्य परिषद) के नए स्वायत्त नियमों के कारण, वे नागरिक क्षेत्रों में सीधे तब तक हस्तक्षेप नहीं कर सकते थे, जब तक मुख्यालय से 'असाधारण आपातकाल' का लिखित आदेश न आ जाए।

"वीरा! तुम लोग रुक क्यों गए हो? आगे बढ़ो, वे राक्षस बस्तियों को उजाड़ रहे हैं!" रक्तेश ने नाव के किनारे से चिल्लाकर कहा।

वीरा ने मुड़कर रक्तेश को देखा, उसका चेहरा कड़ा और तनावग्रस्त था। "हम सीधे नहीं कूद सकते, रक्तेश! उत्तर की 'कॉर्टेक्स काउंसिल' ने हमारे संचार तंत्र (Chemical Signaling) पर अपनी चौकियां बना दी हैं। हमारा संदेश ऊपर चांसलर के पास अविश्वास के घेरे में अटका हुआ है। वे सोच रहे हैं कि यह आपातकाल हमारी सैन्य स्वायत्तता बढ़ाने का कोई बहाना है! जब तक वहां से रासायनिक सहमति (Cytokine Clearance) नहीं मिलती, हम अपनी पूरी ताकत से हमला नहीं कर सकते!"

यह इस टूटे हुए तंत्र की पहली कड़वी सच्चाई थी। सैनिक लड़ने को तैयार थे, लेकिन राजनैतिक अविश्वास के कारण आदेशों की कड़ियाँ आपस में उलझ चुकी थीं।

ऊपर, मस्तिष्क नगर के प्रशासनिक गलियारों में विद्युत तरंगें सामान्य से कहीं अधिक तीव्र और लालिमा लिए हुए दौड़ रही थीं। 'कॉर्टेक्स काउंसिल' के रणनीतिकार, लॉर्ड फ्रंटल, चांसलर सेरेब्रम के सामने खड़े थे।

"चांसलर, नासिका क्षेत्र से लगातार संकट के आवेग (Pain Signals) आ रहे हैं। वायरस अपनी सेना बढ़ा रहा है। क्या हमें तुरंत एड्रिनल ग्रंथि को आपातकालीन रसायन (Adrenaline) छोड़ने का निर्देश देना चाहिए? क्या हमें हृदय दुर्ग को रक्त का प्रवाह और तापमान बढ़ाने की अनुमति देनी चाहिए?"

चांसलर सेरेब्रम ने अपने माथे पर हाथ रखा। उनके न्यूरॉन्स के जाल में एक गहरी असमंजस की बिजली कड़क रही थी। उन्होंने बेहद गंभीर स्वर में कहा:

"लॉर्ड फ्रंटल, आंकड़ों को दोबारा जांचो। हृदय दुर्ग का 'समान वितरण मोर्चा' पहले ही हमसे रसद छीनने की ताक में है। अगर हमने इस मामूली घुसपैठ के लिए पूरे साम्राज्य में आपातकाल (Systemic Response) घोषित कर दिया, तो किंग वेंट्रिकल रक्त के दबाव पर पूरा नियंत्रण कर लेंगे। वे कहेंगे कि संकट के समय सेना और राजा ही रक्षक हैं। हम अपनी तार्किक प्रशासनिक व्यवस्था को दांव पर नहीं लगा सकते। संवेदी अंगों से कहो कि वे स्थानीय स्तर पर ही स्थिति को संभालने का संदेश भेजें। यह कोई बड़ा संकट नहीं है।"

तर्कवादी काउंसिल अपने ही राजनैतिक डर में अंधी हो चुकी थी। वे आंकड़ों में यह देखना भूल गए कि एक वायरस कितनी तेजी से पूरे देश के ताने-बाने को बदल सकता है।

उधर, दक्षिण के 'हृदय दुर्ग' में किंग वेंट्रिकल अपने सिंहासन पर बेचैनी से टहल रहे थे। उनकी धड़कनों की लय धक्-धक्...धक्-धक्... से बढ़कर एक हिंसक गति ले चुकी थी।

"महाराज!" फेफड़ों के रक्षक ने हांफते हुए कक्ष में प्रवेश किया। "उत्तर की काउंसिल ने हमारे मुख्य वायु-मार्गों को यह संदेश भेजा है कि स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन हमारे जहाजों ने देखा है कि नासिका के घाटों पर कोशिकाएं मर रही हैं! चांसलर इस संकट को छुपा रहे हैं!"

किंग वेंट्रिकल की मुट्ठी कस गई। उनकी आँखों में अपने नागरिकों के लिए तड़प और चांसलर के लिए गुस्सा था।

"सेरेब्रम की वह ठंडी बुद्धि इस देश को ले डूबेगी! वे अपने कागज़ी आंकड़ों को बचाने के लिए बस्तियों को मरने दे रहे हैं। यदि काउंसिल आदेश नहीं देगी, तो क्या हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे? नहीं! धमनियों के सभी कप्तानों को आदेश दो—संसाधनों की परवाह मत करो, प्रभावित क्षेत्रों की तरफ रक्त का प्रवाह तेज करो! हमें वहां ऑक्सीजन पहुँचानी होगी, चाहे इसके लिए हमें उत्तर के नियमों को तोड़ना ही क्यों न पड़े!"

राजा ने लोक-कल्याण के नाम पर एकतरफा कार्रवाई का फैसला कर लिया। उन्होंने बिना मस्तिष्क के समन्वय के, सीधे प्रभावित अंगों की तरफ खून का दबाव बढ़ा दिया।

और यहीं पर व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

जब हृदय दुर्ग ने बिना किसी केंद्रीय योजना (Nervous Coordination) के अचानक रक्त का प्रवाह बढ़ा दिया, तो नासिका मार्ग की बारीक नसें (Capillaries) उस भारी दबाव को झेल नहीं पाईं। वे टूटने लगीं। प्रभावित बस्तियों में पानी और तरलता (Congestion और Inflammation) भरने लगी।

उधर, 'पाचन सिंडिकेट' ने जब देखा कि रक्त का मार्ग अनियंत्रित हो रहा है, तो उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए पोषक तत्वों की आपूर्ति और धीमी कर दी। नतीजतन, जो सैनिक (WBC) मोर्चे पर लड़ रहे थे, उनके पास न तो सही समय पर ऑक्सीजन पहुँच पा रही थी, और न ही ग्लूकोज की ऊर्जा।

समन्वय पूरी तरह असफल हो चुका था। मस्तिष्क के पास सही डेटा नहीं था, हृदय के पास सही योजना नहीं थी, सेना के पास स्पष्ट आदेश नहीं थे, और पाचन तंत्र ने तिजोरियों पर ताला लगा रखा था।

रक्तेश ने अपनी नाव को एक सुरक्षित किनारे से बांधा। हवा अब भारी, गर्म और चिपचिपी हो चुकी थी। नासिका के आसमान से पानी की भारी बूंदें (नाक बहना/Mucus Secretion) गिरने लगी थीं। साम्राज्य का तापमान बढ़ रहा था—बुखार का पहला बड़ा हमला हो चुका था।

उसने देखा कि उसकी दोस्त वीरा मुट्ठी भर सैनिकों के साथ बिना किसी बैकअप के उस वायरस की बढ़ती बाढ़ के सामने खड़ी थी। वे अपनी मातृभूमि के लिए मर रहे थे, लेकिन उनके पीछे खड़ा पूरा साम्राज्य राजनैतिक मतभेदों के कारण लकवाग्रस्त हो चुका था।

रक्तेश ने टूटी हुई केपिलरी के लाल पानी में हाथ डाला। पानी का तापमान उसके हीमोग्लोबिन को झुलसा रहा था। उसने निराशा से सिर झुकाया और बुदबुदाया:

"जब घर के बड़े आपस में लड़ रहे हों... तो बाहर के चोरों को दीवार लांघने के लिए किसी फौज की जरूरत नहीं होती।"

महासमरसता की पहली परीक्षा में देह साम्राज्य बुरी तरह विफल हो चुका था। एक अकेले वायरस ने उस महाशक्तिशाली देश को घुटनों पर ला दिया था, जो कभी अजेय माना जाता था। स्वर्ण युग का अंत अब केवल वैचारिक नहीं था, वह जैविक रूप से विनाशकारी साबित हो रहा था।

अध्याय 6 समाप्त।