शरीर साम्राज्य का महायुद्ध - अध्याय 7 : विभाजन की शुरुआत

 

अध्याय 7 : विभाजन की शुरुआत

नासिका मार्ग के असफल समन्वय की त्रासदी ने देह साम्राज्य के बचे-कुचे भरोसे को भी राख कर दिया था। स्थानीय बस्तियों में फैली सूजन, नसों का अप्रत्याशित खिंचाव और बढ़ता हुआ जैविक तापमान केवल किसी बाहरी वायरस की ताकत नहीं थे; वे देह साम्राज्य की आंतरिक प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता प्रमाण थे।

परंतु, अपनी इस सामूहिक हार से कोई सबक सीखने के बजाय, साम्राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने उस रात आत्ममंथन का रास्ता नहीं चुना, बल्कि एक-दूसरे पर दोषारोपण का ऐसा घिनौना खेल शुरू किया जिसने विभाजन को अपरिहार्य बना दिया।

अगली ही सुबह, जब प्रभावित क्षेत्रों से कोशिकाओं के शव बह रहे थे, मस्तिष्क नगर की 'कॉर्टेक्स काउंसिल' से एक कड़ा राजकीय श्वेतपत्र जारी हुआ:

"हृदय दुर्ग की अविवेकपूर्ण, उग्र और भावुक कार्रवाई ने रक्त का दबाव अस्वाभाविक रूप से बढ़ाकर बारीक नसों को तोड़ा और सूजन को कई गुना बढ़ा दिया। यदि दक्षिण ने हमारी तार्किक योजनाओं का इंतजार किया होता, तो यह स्थिति पैदा न होती।"

इस गंभीर आरोप के लगते ही 'स्वायत्त दक्षिणी मोर्चे' से किंग वेंट्रिकल की भारी दहाड़ गूंजी:

"मस्तिष्क की प्रशासनिक देरी और आंकड़ों की अंधी जांच ने वायरस को बढ़ने के लिए हफ़्तों का समय दिया! जब बस्तियां मर रही थीं, चांसलर सेरेब्रम केवल विश्लेषण कर रहे थे। अगर हमारी धड़कनों ने रक्त न बढ़ाया होता, तो पूरा नासिका मार्ग नष्ट हो चुका होता।"

कोई भी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं था। हर अंग दूसरे को गद्दार और खुद को देशभक्त साबित करने में लगा था। और इसी राजनैतिक दोषारोपण के जहर के बीच, चांसलर सेरेब्रम ने वह अंतिम कदम उठाया जिसने साम्राज्य के भूगोल को हमेशा के लिए बदल दिया।

कपाल घाटी के दक्षिणी निकास मार्गों पर रातों-रात 'तर्क द्वार' (The Gates of Logic) स्थापित कर दिए गए। चांसलर के आदेश पर तंत्रिका मार्गों (Nerves) के बीचों-बीच विद्युत-बाड़ (Synaptic Barriers) खड़ी कर दी गईं।

जब रक्तेश अपना मालवाहक जहाज लेकर उत्तर के अंतिम मुख्य नदी-घाट पर पहुँचा, तो वहाँ हज़ारों लाल कोशिकाओं और प्लेटलेट मजदूरों की भीड़ जमा थी। प्रहरियों ने उसके जहाज को रोक दिया। जो नदियाँ कभी पूरे साम्राज्य को एक धागे में पिरोती थीं, वे अब दो अलग-अलग नागरिकताओं के पहचान-पत्र बांट रही थीं। रक्तेश का छोटा भाई, जो दक्षिण के पेशी राज्यों से अपनी नाव लेकर वहां पहुँचा था, उसने रक्तेश का हाथ पकड़कर भरी आवाज़ में पूछा, "भैया! उत्तर की सीमा बंद हो गई है? क्या माँ को पता है कि अब हम उत्तर नहीं जा सकते?"

रक्तेश के पास कोई जवाब नहीं था। उसने अपनी जेब से वह संदेश और माँ की दवा की पोटली निकाली जो सीमा पर ही ज़ब्त कर ली गई थी। उत्तर की स्वायत्त सरकार ने दक्षिण के किसी भी भावनात्मक संदेश को 'अस्थिरता फैलाने वाली सामग्री' मानकर अस्वीकार कर दिया था।

लेकिन यह निर्णय किसी क्रूरता से नहीं जनमा था, इसके पीछे भी एक विवश देशभक्ति थी।

उसी रात, चांसलर सेरेब्रम ने अपने एकांत कक्ष में सीमा पर लौटाए गए संदेशों और सामग्रियों की सूची देखी। उनके न्यूरॉन धुंधले पड़ रहे थे। सूची को पढ़ते हुए अचानक उनकी उंगलियाँ एक नाम पर आकर ठहर गईं—रक्तेश और उसकी बूढ़ी माँ का पत्र। कुछ क्षणों तक चांसलर की उंगलियाँ उस नाम पर कांपती रहीं। उन्हें याद आया कि यह वही रक्तेश था जिसने हफ़्तों पहले उनके विचार-महलों को अपनी ऊर्जा से सींचा था।

चांसलर ने एक गहरी, अत्यंत थकी हुई सांस ली और अपनी आँखें बंद कर लीं। उन्होंने अपने खाली कमरे में धीरे से कहा, "यदि मैं आज एक पत्र और एक दवा को अनुमति दूँगा, तो कल हजारों और आएँगे। और तब यह सीमा केवल एक कागज़ी प्रतीक बनकर रह जाएगी। तर्कबुद्धि को कठोर होना ही होगा।" उन्होंने कांपते हाथों से सूची पर अस्वीकृति के हस्ताक्षर कर दिए। लेकिन उस रात, मस्तिष्क नगर का वह सबसे बुद्धिमान शासक देर तक सो नहीं सका।

इस प्रशासनिक अलगाव के जवाब में, उसी रात राजा के आदेश पर महाधमनी (Aorta) के मुख्य मोर्चे पर एक विशाल घोषणा-पत्र लगा दिया गया। दक्षिण क्षेत्र ने खुद को आधिकारिक रूप से 'स्वायत्त दक्षिणी मोर्चा' घोषित कर दिया। फेफड़ों ने भी दक्षिण का साथ देते हुए श्वास-वायु के प्रवाह की लय को पूरी तरह से हृदय की धड़कनों के साथ सिंक कर लिया।

विभाजन की सीमाएं अब अंतिम रूप से खिंच चुकी थीं। लेकिन इससे पहले कि दोनों क्षेत्रों के बीच संवाद के सारे तार हमेशा के लिए टूट जाते, तंत्रिका राजमार्ग के आखिरी जीवित सिनेप्स के जरिए एक अंतिम संदेश उत्तर से दक्षिण की ओर भेजा गया। यह कोई युद्ध का अल्टीमेटम नहीं था, बस दो पुराने मित्रों की आत्माओं की आखिरी पुकार थी।

मस्तिष्क नगर से एक संक्षिप्त, इलेक्ट्रो-केमिकल पत्र हृदय दुर्ग पहुँचा:

"पुराने मित्र, मैं तुम्हारा शत्रु नहीं हूँ।"सेरेब्रम

कुछ ही पलों बाद, लाल नदी की आखिरी गर्म तरंग के सहारे दक्षिण से उसका उत्तर कपाल घाटी की ओर लौटा:

"मैं भी नहीं। और यही हमारी सबसे बड़ी समस्या है।"वेंट्रिकल

बस इतना ही। इस संक्षिप्त संवाद ने दोनों महलों की दीवारों को हिलाकर रख दिया। वे दोनों जानते थे कि वे शत्रु नहीं थे, वे दोनों ही अपनी-अपनी जगह साम्राज्य को बचाना चाहते थे—एक नियम से, तो दूसरा करुणा से। और यही इस महायुद्ध की सबसे बड़ी त्रासदी थी।

रात अपनी पूरी भयावहता के साथ गहरी हो चुकी थी।

रक्तेश अपनी नाव को लेकर उस नई राजनैतिक सीमा के पास से गुजर रहा था, जहाँ उत्तर और दक्षिण के क्षेत्र अलग होते थे। उसने देखा कि नदी के पानी का रंग अब एक जैसा नहीं था। उत्तर की ओर जाने वाला पानी विद्युत-तरंगों के कारण हल्का नीला और ठंडा दिख रहा था, जबकि दक्षिण की ओर बहने वाली धारा गहरी लाल और गर्म थी। दोनों धाराएं एक ही स्रोत से निकली थीं, दोनों एक ही समुद्र की ओर बह रही थीं, फिर भी अब वे एक-दूसरे को छूने से डर रही थीं।

साम्राज्य के बुर्जों पर नए झंडे लहरा रहे थे, मोर्चे खिंच चुके थे, और सीमाओं पर एक भयानक, जमा देने वाली शांति पसरी थी।

लेकिन सबसे बड़ी त्रासदी यह नहीं थी कि देश दो हिस्सों में बंट चुका था। सबसे बड़ी त्रासदी यह थी कि हज़ारों वर्षों से चला आ रहा वह पावन नियम टूट चुका था। 'होमियोस्टैसिस' कभी कोई प्रशासनिक नियम नहीं था... वह एक विश्वास था। वह एक अटूट भरोसा था कि जब पैर में कांटा चुभेगा, तो आँख रोएगी और हाथ उसे निकालने आगे बढ़ेगा। और उस रात, देह साम्राज्य ने केवल अपनी भौगोलिक सीमाएँ नहीं खोईं—उसने उस आदिम विश्वास को खो दिया, जो उसे एक शरीर बनाता था।

और किसी भी साम्राज्य की मृत्यु तब नहीं होती जब उसकी बाहरी सीमाएँ टूटती हैं। उसकी मृत्यु तो तब होती है जब उसके नागरिक यह मानना छोड़ देते हैं कि वे एक-दूसरे के लिए बने हैं।

अब वे केवल मांस और हड्डियों के अलग-अलग टुकड़े थे, जो एक महायुद्ध के मुहाने पर खड़े थे।

📖 भाग 1 (स्वर्ण युग) पूर्णतः समाप्त।