शरीर साम्राज्य का महायुद्ध - अध्याय 21 : मलबे का हिसाब
भाग 4 : नव-निर्माण
अध्याय 21 : मलबे का हिसाब
जब तूफ़ान गुज़र जाता है और पहली साँस स्थिर होने लगती है, तब साम्राज्य अपनी जीत के पैमानों को नहीं, बल्कि अपनी बस्तियों के खालीपन को मापता है। इन्फ्लुएंजा की वह बर्फीली सेना अब केवल एक मृत आनुवंशिक इतिहास बनकर ज़मीन पर बिखरी थी। धुंध के पीछे से आ रही वह मटमैली धूप जब पाचन घाटी और श्वास-मार्गों पर पड़ी, तो उसने किसी राजसी वैभव को नहीं, बल्कि हज़ारों सालों की उस साझी विरासत को दिखाया जो अब राख के रूप में तैर रही थी।
यह पुनर्निर्माण का पहला पहर था, लेकिन इसकी शुरुआत किसी नए महल की नींव रखने से नहीं, बल्कि मलबे के भीतर दबे अपने लोगों को ढूँढने से होनी थी।
रक्तेश ने अपनी नाव के पतवार को संभाला। नदी का पानी अब खौल नहीं रहा था, लेकिन वह अभी भी पूरी तरह पारदर्शी नहीं हुआ था। पानी के भीतर एंटीबॉडीज के टूटे हुए वाई-आकार के तीर और वायरसों के गले हुए स्पाइक्स एक साथ बह रहे थे। नदी में अब उत्तर और दक्षिण की धाराओं का कोई अलग रंग नहीं बचा था; वे दोनों एक धुंधले, मटमैले रंग में घुलकर शांत बह रही थीं।
नाव जब मुख्य श्वास-मार्ग के उस जंक्शन पर पहुँची जहाँ वीरा का मोर्चा था, तो वहाँ का सन्नाटा पत्थरों से भी भारी था।
वहाँ वीरा अभी भी अपनी ज़मीन गाड़े बैठी थी। उसके सामने चिन्मय और स्पंदन मलबे के ढेरों को अपने हाथों से हटा रहे थे। तीनों के बीच कोई संवाद नहीं था।
तभी, मलबे के एक बहुत गहरे हिस्से से एक धीमी सी हलचल हुई। स्पंदन ने आगे बढ़कर पत्थरों को हटाया। नीचे एक छोटी, नवजात कोशिका दबी हुई थी। उसका आधा हिस्सा रासायनिक आग से झुलस चुका था, लेकिन उसके भीतर एक बहुत ही बारीक, थरथराती हुई पल्स अभी बाकी थी। वह जीवित थी।
चिन्मय आगे बढ़ा। उसने अपने टूटे हुए न्यूरॉन-तारों से एक बहुत ही धीमी, नियंत्रित विद्युत-तरंग निकाली और उसे उस झुलसी हुई कोशिका के नाभिक तक पहुँचाया। वह कोई प्रशासनिक आदेश नहीं था; वह केवल उस मरती हुई कोशिका को यह बताने का प्रयास था कि खतरा टल चुका है और मरम्मत शुरू की जा सकती है।
स्पंदन ने अपनी लाल पोशाक का एक हिस्सा फाड़ा और उससे उस कोशिका के बहते हुए प्लाज्मा को बाँध दिया। दोनों ने मिलकर उस मलबे से उस पहली ज़िंदगी को बाहर निकाला।
ठीक उसी समय, घाटी के ऊपरी मुहाने पर 'फाइब्रोब्लास्ट' (The Fibroblasts) के मजदूरों की पहली कतार दिखाई दी। ये साम्राज्य के वे राजमिस्त्री थे जो तब आते हैं जब सब कुछ ढह जाता है।
उनके हाथों में न तो तलवारें थीं और न ही न्याय की तराजू; उनके पास केवल 'कोलेजन' (Collagen) के लंबे, सफेद और चिपचिपे धागे थे। वे किसी राजकीय आदेश की प्रतीक्षा किए बिना, फेफड़ों की उन फटी हुई रेशमी दीवारों पर पहुँच गए जो पल्मोनरी एडिमा के पानी में डूब चुकी थीं।
उन्होंने उन फटे हुए छिद्रों पर कोलेजन के धागे बुनना शुरू कर दिया। वे कोई सुंदर महल नहीं बना रहे थे; वे तो बस उस बहते हुए पानी को रोकने के लिए खुरदरे, बदसूरत टाँके लगा रहे थे। ये टाँके इस बात का साक्ष्य थे कि साम्राज्य बच तो जाएगा, लेकिन उसके सीने पर इस महाविनाश के गहरे और अमिट निशान हमेशा के लिए रह जाएंगे। देह साम्राज्य अब कभी पहले जैसा अछूता नहीं हो सकता था।
उधर, हृदय दुर्ग और मस्तिष्क नगर के बीच के मुख्य राजमार्ग पर दो बूढ़े व्यक्ति धीरे-धीरे पैदल चल रहे थे। चांसलर सेरेब्रम और किंग वेंट्रिकल।
दोनों के पैर मलबे की कीचड़ में धँस रहे थे। चांसलर का दायाँ हिस्सा ऑक्सीजन की उस लंबी कमी के कारण थोड़ा सा शिथिल था, जिससे वे लँगड़ा कर चल रहे थे। राजा ने अपना मजबूत बायाँ कंधा चांसलर के नीचे लगा रखा था। वे दोनों एक-दूसरे को थामे हुए अपनी ही बस्तियों का उजड़ा हुआ भूगोल देख रहे थे।
वे उस न्यूट्रल मेज के पास पहुँचे, जहाँ हफ़्तों पहले 'संवेदन परिषद' बैठी थी। मेज टूटकर एक तरफ झुकी हुई थी। उसके ऊपर रक्तेश की माँ के पत्र का वह आखिरी सफ़ेद, कोरा टुकड़ा पड़ा था, जो पानी से भीगकर गल चुका था।
चांसलर ने उस कोरे कागज़ को देखा, फिर राजा की ओर देखा। उनकी आवाज़ में अब कोई बौद्धिक अहंकार नहीं था:
"वेंट्रिकल... हमारे पास अब लिखने के लिए कोई नियम नहीं बचे।"
किंग वेंट्रिकल ने मेज के उस टूटे हुए हिस्से पर अपना हाथ रखा, जहाँ कभी उनका लाल मुकुट हुआ करता था। उन्होंने बहुत ही शांत, थकी हुई आवाज़ में उत्तर दिया:
"अच्छा है, सेरेब्रम। अब हम नियमों से नहीं... इन टाँकों से इस घर को चलाएंगे।"
रक्तेश ने नाव से इस दृश्य को देखा।
लेंस मीनार के पार से आ रही धूप अब थोड़ी सी साफ़ हो रही थी। हवा में अभी भी थोड़ी कड़वाहट थी, और फेफड़ों की घाटी से अभी भी कहीं-कहीं मलबे के गिरने की मूक आवाजें आ रही थीं।
तभी, नदी के निचले छोर से भोजन-रस के पहले कुछ साधारण, छोटे पैकेट्स बहते हुए आए। वे बहुत कम थे, किसी उत्सव के लिए पर्याप्त नहीं थे, लेकिन वे भूखे नागरिकों की पहली भूख को शांत करने के लिए बढ़ रहे थे।
रक्तेश ने अपनी नाव के पतवार को मोड़ा। उसकी नाव पर अब कोई पत्र नहीं था, कोई संदेश नहीं था, लेकिन उसके सामने एक पूरी नदी थी जिसे साफ़ किया जाना था।
नदी के नीचे से फाइब्रोब्लास्ट के हथौड़ों की धीमी आवाज़ आ रही थी।
ठक....... ठक....... ठक.......
पुनर्निर्माण सुंदर नहीं था। लेकिन वह शुरू हो चुका था।
अध्याय 21 समाप्त।