शरीर साम्राज्य का महायुद्ध - अध्याय 24 : स्मृति के निशान

 

अध्याय 24 : स्मृति के निशान

जब बस्तियों में रसद पहुँचने लगती है और धड़कनें अपनी पुरानी लय को टटोलने लगती हैं, तब साम्राज्य का सामना अपने सबसे गहरे घाव से होता है—वह घाव जो शरीर पर नहीं, बल्कि उसकी याददाश्त पर लगा था। इन्फ्लुएंजा का संकट टल चुका था, लेकिन लेंस मीनार (The Cranial Observatory) के बुर्जों से जब चांसलर सेरेब्रम ने नीचे देखा, तो उन्हें समझ आया कि व्यवस्था का पुनर्जन्म तो हो गया है, पर इतिहास को पूरी तरह मिटाया नहीं जा सकता।

घाव भर रहे थे, लेकिन उनके पीछे जो निशान छूट रहे थे, वे नए साम्राज्य की सीमाओं को तय करने वाले थे।

रक्तेश अपनी नाव को मस्तिष्क नगर की ओर जाने वाली एक संकरी, शांत नहर में खे रहा था। यहाँ नदी का पानी अब पूरी तरह पारदर्शी था, लेकिन उसके किनारे लगे कंक्रीट के ब्लॉक अभी भी रासायनिक धुएँ से काले पड़े थे।

वह जब मुख्य संवेदन कक्ष के मुहाने पर पहुँचा, तो उसने वहाँ चिन्मय को देखा। चिन्मय तंत्रिका-मार्गों के एक विशाल, झुलसे हुए जंक्शन पर खड़ा था। उसके हाथ में कुछ नए, चमकीले 'मायलीन' (Myelin) के पैच थे, जिन्हें वह उन तारों पर लपेट रहा था जो पिछले युद्ध में पिघल गए थे।

तभी, मुख्य राजमार्ग से वीरा वहाँ पहुँचे। उसकी कटी हुई ढाल अब उसकी पीठ पर बंधी थी, और उसकी सिपाही पोशाक की जगह अब एक साधारण नागरिक वस्त्र था। उसकी आँखों का वह कड़ा सैन्य संयम अब एक शांत उदासी में बदल चुका था।

उसने चिन्मय को एक तार जोड़ते हुए देखा और बहुत ही धीमे स्वर में कहा: "यह रास्ता फिर से जुड़ तो जाएगा, चिन्मय... लेकिन यहाँ से गुज़रने वाले सिग्नल अब पहले जैसी गति से नहीं दौड़ेंगे।"

चिन्मय ने हाथ रोककर उस जुड़े हुए खुरदरे जोड़ को देखा। उसने अपने संवेदक से एक हल्का सा विद्युत-करंट दौड़ाया। करंट वहाँ से गुज़रा, लेकिन उसकी गति में एक मामूली सी हिचकी थी (Delayed Conduction)।

"मैं जानता हूँ, वीरा," चिन्मय ने तार को छोड़ते हुए उत्तर दिया। "मस्तिष्क ने अपनी कई पुरानी कड़ियाँ खो दी हैं। कुछ ऐसी यादें, कुछ ऐसे विचार जो इस युद्ध से पहले हमारे पास थे, वे अब इस मलबे के नीचे हमेशा के लिए दफ़्न हो चुके हैं। साम्राज्य अब पहले की तरह तेज़ी से नहीं सोच पाएगा।"

वीरा ने मुड़कर नीचे बहती नदी को देखा जहाँ हीमोग्लोबिन के जहाज अब रसद लेकर शांति से गुज़र रहे थे।

"अच्छा ही है," वीरा बुदबुदाया। "तेज़ सोचने की ज़िद ने ही हमें श्रेष्ठता की उस बहस में झोंका था। साम्राज्य जितना धीमा सोचेगा, उसके भीतर अपनों को खोने का दर्द उतना ही कम उठेगा।"

उसी समय, नदी के रास्ते स्पंदन की नाव भी वहाँ आकर रुकी। वह अपनी नाव से उतरा और उन दोनों के पास आकर खड़ा हो गया। उसके हाथ में दक्षिण के हृदय दुर्ग से लाया गया एक छोटा सा साक्ष्य था—एक बंद हो चुका पुराना सुरक्षा कोड।

"हृदय दुर्ग ने अपनी दीवारें छोटी कर ली हैं, चिन्मय," स्पंदन ने कहा। "किंग वेंट्रिकल ने आदेश दिया है कि अब दुर्ग के बुर्जों पर कोई नया राजसी पहरा नहीं बैठेगा। जो पेशियाँ झुलस गई थीं, वहाँ अब फाइब्रोब्लास्ट के सफ़ेद निशान (Fibrotic Scars) हमेशा के लिए जम चुके हैं। हमारा दिल अब बड़ा साम्राज्य नहीं माँगता; वह केवल इस छोटे से घर को थामना चाहता है।"

चिन्मय ने स्पंदन के कंधे पर हाथ रखा। उन दोनों के बीच अब न तो उत्तर की बौद्धिक श्रेष्ठता की कोई दीवार थी और न ही दक्षिण के श्रम का कोई अहंकार। वे दोनों जानते थे कि वे एक ऐसे साम्राज्य के नागरिक हैं जो बच तो गया है, लेकिन जिसके भीतर अब एक पर स्थायी बुढ़ापा (Permanent Deficit) आ चुका था।

रक्तेश ने अपनी जेब में हाथ डाला। उसकी उँगलियाँ उस खाली जगह को टटोलती रहीं जहाँ कभी उसकी माँ का पत्र हुआ करता था। पत्र का वह आखिरी सफ़ेद, कोरा टुकड़ा भी कल रात की रसद के पानी में घुलकर हमेशा के लिए बह गया था। अब उसके पास माँ की लिखावट का कोई भौतिक साक्ष्य नहीं बचा था।

लेकिन जब उसने अपनी नाव के डेक से सिर उठाकर ऊपर देखा, तो लेंस मीनार के काँच पर बाहर की दुनिया का एक नया दृश्य उभर रहा था।

धुंध पूरी तरह छँट चुकी थी। बाहर एक बहुत ही शांत, नीली और अछूती सुबह की धूप फैली थी। वह धूप साम्राज्य के उन खुरदरे टाँकों, झुलसी हुई बस्तियों और फटे हुए रास्तों पर पड़ रही थी।

नदी के नीचे से आ रही फाइब्रोब्लास्ट के हथौड़ों की वह आवाज़ अब बहुत धीमी हो चुकी थी।

ठक....... ठक....... ठक.......

निशान बदसूरत थे। लेकिन वे इस बात का सबूत थे कि इस घर ने हार मानने से इनकार कर दिया था।

अध्याय 24 समाप्त।